सरमस्तपुर में किसानों को एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण, मिलेगा क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा।

प्रशिक्षण: एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन से बढ़ेगी किसानों की आय l
सरमस्तपुर में किसानों को एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण, मिलेगा क्लस्टर आधारित खेती को बढ़ावा।
सकरा। केंद्रीय एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन केंद्र, पटना की ओर से सरमस्तपुर पंचायत सरकार भवन में ईएजीइनोवेशन एफपीसी के किसानों को प्राकृतिक खेती, पर्यावरण अनुकूल कृषि और एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन की तकनीकों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान मित्र कीटों की पहचान, वानस्पतिक कीटनाशकों के महत्व एवं उपयोग, रासायनिक कीटनाशकों के सुरक्षित और संतुलित प्रयोग तथा फसलों में लगने वाले प्रमुख कीटों एवं रोगों के प्रबंधन के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने कीटनाशकों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करते हुए खेती की लागत कम करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दूसरे दिन वनस्पति संरक्षण अधिकारी विवेक कांत गुप्ता और सहायक वनस्पति संरक्षण अधिकारी साक्षी ने संयुक्त रूप से किसानों को प्रशिक्षण दिया। इसके बाद सरमस्तपुर में एफपीसी के क्लस्टर आधारित सब्जी उत्पादन क्षेत्र का फील्ड विजिट कराया गया। इस दौरान पत्तागोभी, बैंगन और गेंदा फूल की खेती का निरीक्षण कर खेतों में मौजूद मित्र एवं शत्रु कीटों की पहचान और उनके प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
क्लस्टर आधारित खेती से किसानों को होगा फायदा
विशेषज्ञों ने बताया कि क्लस्टर आधारित खेती से किसान समूह में एक ही क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से फसलों का उत्पादन कर सकते हैं। इससे कृषि सामग्री की सामूहिक खरीद, तकनीकी सलाह, कीट-रोगों की निगरानी और उपज के विपणन में सहूलियत मिल सकती है। गेंदा फूल जैसी सहायक फसलों को सब्जियों के साथ लगाने से मित्र कीटों को आकर्षित करने और जैविक कीट नियंत्रण को बढ़ावा देने में भी मदद मिल सकती है। एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन अपनाने से अनावश्यक कीटनाशक छिड़काव में कमी, उत्पादन लागत में बचत और सुरक्षित कृषि उत्पाद प्राप्त करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
मौके पर राजेश कुमार, पर्यवेक्षक, सकरा; रौशन कुमार, अध्यक्ष, ईएजीइनोवेशन एफपीसी तथा कृष्ण प्रकाश गुप्ता, किसान सलाहकार सहित अन्य किसान उपस्थित रहे।

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