मुजफ्फरपुर में औद्योगिक विकास को नई उड़ान: बिहार कौशल विकास मिशन के साथ जुड़ी मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना से सशक्त होंगे उद्योग और युवा :- जिलाधिकारी ll

मुजफ्फरपुर में औद्योगिक विकास को नई उड़ान: बिहार कौशल विकास मिशन के साथ जुड़ी मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना से सशक्त होंगे उद्योग और युवा :- जिलाधिकारी ll
 उद्योग–युवा समन्वय की प्रभावशाली पहल: मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना से बढ़ेगी उत्पादकता, सुदृढ़ होगा मुजफ्फरपुर का औद्योगिक वातावरण l
 प्रशिक्षित मानव बल से तेज़ होगी विकास की रफ्तार: मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना से उद्योगों को नई ताकत, युवाओं को नया अवसर l
बियाडा में उद्यमियों के लिए हुआ कार्यशाला का आयोजन: मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना l
जिले में उद्यमियों को प्रोत्साहित करने तथा औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए जिला प्रशासन लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि एक ओर उद्योग वार्ता द्वारा उद्यमियों की समस्याओं का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान किया जा रहा है दूसरी ओर मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना से उद्योगों को जोड़कर उन्हें मानव बल से सशक्त बनाकर उनकी उत्पादकता बढ़ाने तथा समग्र औद्योगिक विकास की गति को तेज करने का प्रयास किया गया है। इसके लिए जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन ने उद्यमियों से सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से जुड़ने तथा लाभ उठाने की अपील की है।

उद्योग वार्ता के उपरांत बियाडा सभागार में बिहार कौशल विकास मिशन के तत्वावधान में पटना से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा उद्यमियों को मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान उद्यमियों से अपील की गई कि वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत योजना से जुड़कर इसका अधिकतम लाभ उठाएं, ताकि उद्योगों को प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके और युवाओं को रोजगारमूलक अवसर प्राप्त हो।

योजना का उद्देश्य
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मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को उद्योग आधारित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें कुशल, सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। यह योजना 18 से 28 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में प्रशिक्षु के रूप में जोड़कर उन्हें वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव प्रदान करती है। इसके माध्यम से उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षित मानव बल मिलता है, जबकि युवाओं को रोजगार की दिशा में सशक्त अवसर प्राप्त होता है।

जिला पदाधिकारी ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि स्थानीय युवाओं को उद्योगों से जोड़ा जाए तो न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि जिले में औद्योगिक वातावरण भी सुदृढ़ होगा।

उद्यमियों के लिए योजना से जुड़ने की प्रक्रिया
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विशेषज्ञ टीम ने उद्यमियों को योजना से जुड़ने की चरणबद्ध प्रक्रिया समझाई।
✓पंजीकरण – इच्छुक उद्यमी को संबंधित पोर्टल https//cmpratigya.bihar.gov.in पर अपने उद्योग का पंजीकरण करना होगा।

✓मानव बल की आवश्यकता का विवरण – उद्योग को यह बताना होगा कि उसे किस प्रकार के कौशलयुक्त प्रशिक्षुओं की आवश्यकता है, कितनी संख्या में और किस अवधि के लिए।

✓चयन एवं मिलान (मैचिंग प्रक्रिया) – बिहार कौशल विकास मिशन द्वारा उपलब्ध प्रशिक्षित युवाओं की सूची से उद्योग की मांग के अनुरूप चयन किया जाएगा।

✓प्रशिक्षण अवधि – चयनित प्रशिक्षु निर्धारित अवधि तक उद्योग में कार्य कर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

✓मूल्यांकन एवं प्रमाणन – प्रशिक्षण के उपरांत युवाओं का मूल्यांकन कर प्रमाणन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

इस प्रक्रिया में प्रशासन और मिशन की टीम पूर्ण सहयोग प्रदान करती है, जिससे उद्यमियों को किसी प्रकार की जटिलता का सामना न करना पड़े।

योजना के प्रमुख लाभ
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मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना से जुड़ने पर उद्यमियों को अनेक लाभ प्राप्त होते हैं—

✓उद्योगों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो जाता है।

✓स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर उद्योग अपनी दीर्घकालिक मानव संसाधन आवश्यकता पूरी कर सकते हैं।

✓प्रशिक्षुओं के माध्यम से उत्पादन क्षमता और कार्यकुशलता में वृद्धि होती है।

✓उद्योगों को नए कौशल, नई तकनीक और डिजिटल दक्षता से लैस युवा कार्यबल मिलता है।

✓स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होने से सामाजिक एवं आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

जिला पदाधिकारी ने कहा कि जब उद्योग और युवा एक साथ आगे बढ़ेंगे, तब तेज गति से समग्र विकास संभव होगा। यह योजना उद्योग और युवा—दोनों के प्रोत्साहन के लिए प्रभावशाली पहल है।

युवाओं के लिए महत्व
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इस योजना के माध्यम से युवाओं को केवल सैद्धांतिक प्रशिक्षण ही नहीं, बल्कि वास्तविक औद्योगिक वातावरण में कार्य करने का अवसर मिलता है। इससे उनके आत्मविश्वास, कार्यानुभव और रोजगार क्षमता में वृद्धि होती है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें संबंधित क्षेत्र में नौकरी मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में उद्योगों को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो तकनीकी रूप से दक्ष होने के साथ-साथ व्यवहारिक समझ भी रखते हों। मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना इस अंतर को पाटने का कार्य कर रही है। योजना से संबंधित जानकारी हेतु बिहार कौशल विकास मिशन के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800 296 5656 पर संपर्क किया जा सकता है।

औद्योगिक वातावरण के निर्माण की दिशा में पहल
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 यदि जिले में उद्योगों को सुदृढ़ आधारभूत संरचना, पारदर्शी प्रशासनिक सहयोग और प्रशिक्षित मानव बल उपलब्ध कराया जाए, तो निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। उद्योग वार्ता के माध्यम से जहां समस्याओं का समाधान किया जा रहा है, वहीं मुख्यमंत्री प्रतिज्ञा योजना के माध्यम से मानव संसाधन की आवश्यकता पूरी करने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है।

अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी उद्यमियों से अपील की कि वे आगे आकर योजना से जुड़ें और जिले के युवाओं को अवसर प्रदान करें। इससे एक ओर उद्योगों की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं को रोजगारमूलक प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।

इस समन्वित प्रयास से जिले में सकारात्मक औद्योगिक वातावरण का निर्माण होगा और विकास की नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे।

मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में बृहद जलाशय का होगा सौंदर्यीकरण, जॉगिंग ट्रैक, फब्बारा व पार्क निर्माण के निर्देश l

मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में बृहद जलाशय का होगा सौंदर्यीकरण, जॉगिंग ट्रैक, फब्बारा व पार्क निर्माण के निर्देश l
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की पहल: औद्योगिक विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण और जनसुविधाओं पर विशेष जोर ll
बेला औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमी संवाद कार्यक्रम, आधारभूत संरचना विकास कार्यों को मिलेगी नई गति l
अपने नियमित निरीक्षण कार्यक्रम के तहत जिला पदाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन ने गुरुवार को बेला औद्योगिक क्षेत्र स्थित बृहद जलाशय का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने जलाशय को पर्यावरणीय, सौंदर्यात्मक एवं जनोपयोगी दृष्टिकोण से विकसित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल निकाय के चारों ओर व्यवस्थित जॉगिंग ट्रैक का निर्माण कराया जाए, आकर्षक फव्वारों की स्थापना की जाए, समुचित लाइटिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा बैठने के लिए पर्याप्त संख्या में सीटिंग चेयर लगाई जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत उद्यमियों, श्रमिकों एवं स्थानीय नागरिकों के लिए एक स्वच्छ, हरित एवं स्वास्थ्यवर्धक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने जलाशय के चारों ओर सघन वृक्षारोपण, सौंदर्यीकरण एवं लाइटिंग कार्य कराने का निर्देश दिया, ताकि यह क्षेत्र सुबह-शाम टहलने, व्यायाम करने तथा प्रकृति का आनंद लेने के लिए उपयुक्त स्थल के रूप में विकसित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि जलाशय के ठीक सामने खाली पड़ी भूमि पर एक सुव्यवस्थित, हरा-भरा पार्क विकसित किया जाए, जिससे पूरे औद्योगिक क्षेत्र का वातावरण पर्यावरण के अनुकूल और आकर्षक बन सके।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि इस पहल का उद्देश्य केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत सभी आयु वर्ग के लोगों—युवा, महिला, बुजुर्ग एवं बच्चों—के लिए एक समग्र सार्वजनिक स्थल उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं सामाजिक अवसंरचना का संतुलित विकास भी अत्यंत आवश्यक है। यदि कार्यस्थल के समीप ही लोगों को स्वच्छ एवं हरित परिवेश मिलेगा, तो इससे उनकी कार्यक्षमता एवं मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जल निकाय को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय भी किए जाएं। जलाशय के चारों ओर सौंदर्यीकरण के साथ-साथ स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया, ताकि यह स्थल लंबे समय तक जनोपयोगी बना रहे।

जलाशय निरीक्षण के उपरांत जिला पदाधिकारी ने बेला औद्योगिक क्षेत्र स्थित बियाडा सभागार में उद्यमी संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। संवाद कार्यक्रम में बियाडा के डीजीएम द्वारा अवगत कराया गया कि औद्योगिक क्षेत्र में आधारभूत संरचना के निर्माण हेतु 12 फरवरी से कार्य प्रारंभ हो चुका है। फिलहाल प्रारंभिक चरण में भूमि समतलीकरण का कार्य प्रगति पर है। आने वाले चरणों में सड़क, जल निकासी, विद्युत व्यवस्था एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं के विकास का कार्य किया जाएगा।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उद्यमियों के हित में सभी आवश्यक सुविधाएं यथासंभव शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं, ताकि औद्योगिक गतिविधियों को गति मिल सके। उन्होंने कहा कि उद्योगों के सुचारु संचालन के लिए बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। प्रशासन इस दिशा में पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है।

संवाद कार्यक्रम के दौरान कई उद्यमियों ने अपनी समस्याएं एवं सुझाव प्रस्तुत किए। जिलाधिकारी ने सभी आवेदनों पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए उन्हें समयबद्ध तरीके से सूचित करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता एवं जवाबदेही प्रशासन की प्राथमिकता है, इसलिए प्रत्येक आवेदन की प्रगति से संबंधित जानकारी संबंधित उद्यमी को उपलब्ध कराई जाएगी।

जिलाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि बियाडा में आयोजित संवाद कार्यक्रम के अतिरिक्त भी कोई उद्यमी अपनी सुविधा अनुसार सोमवार अथवा शुक्रवार को कार्यालय अवधि में सीधे उनसे मिलकर आवेदन दे सकते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन पूरी तरह तत्पर है और हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

उद्यमी संवाद कार्यक्रम को सफल एवं प्रभावी बताते हुए कई उद्यमियों ने जिलाधिकारी की इस महत्वपूर्ण पहल की सराहना की। उनका कहना था कि नियमित संवाद से न केवल समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पा रहा है, बल्कि प्रशासन और उद्यमियों के बीच विश्वास एवं समन्वय भी मजबूत हुआ है। उद्यमियों ने कहा कि इस पहल से औद्योगिक क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विकास को नई गति मिली है और निवेश का माहौल भी बेहतर हुआ है।

कुल मिलाकर, बेला औद्योगिक क्षेत्र में जलाशय एवं पार्क विकास की पहल तथा उद्यमियों के साथ सतत संवाद की व्यवस्था से यह स्पष्ट है कि जिला प्रशासन औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन एवं जनसुविधाओं के समन्वित विकास के प्रति गंभीर है। यह पहल न केवल औद्योगिक क्षेत्र की छवि को सुदृढ़ करेगी, बल्कि इसे एक आदर्श, हरित एवं आधुनिक औद्योगिक परिसर के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

गायघाट: शिवदाहा पंचायत में नल जल योजना पूरी तरह फेल..

गायघाट: शिवदाहा पंचायत में नल जल योजना पूरी तरह फेल..
अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के कारनामे ने इस योजना पर फेर दिया पानी l
कागज पर चल रहा नल जल
दीपक कुमार।गायघाट 
गायघाट प्रखंड अंतर्गत शिवदहा पंचायत में नल जल योजना पूरी तरह दम तोड़ती दिखाई दे रही है. राज्य सरकार की महत्वकांक्षी योजनाओं में से एक इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी इलाकों के प्रत्येक घरों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना था. लेकिन अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों के कारनामे ने इस महत्वाकांक्षी योजना पर पानी फेर दिया. जानकारी के अनुसार प्रखंड के 152 वार्डों में इस योजना का शुभारंभ किया गया था. जिनमें करीब दर्जनों वार्डों में नल जल योजना पूरी तरह बंद हो गई है. या उनसे किसी तरह की सप्लाई लोगों तक नहीं पहुंच पाती।
ग्रामीणों की माने तो अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों की उदासीनता और लापरवाही से स्वच्छ जल उन तक पहुंच नहीं पा रहा है. वही अधिकारी इस पूरे मामले में लीपापोती करने में जुटे हुए हैं. निरीक्षण के दौरान भी नही होती है दोषियों पर कार्रवाई नल जल योजना जहां पूरी तरह असफल साबित हो रही है वहीं ग्रामीणों का कहना है कि ये योजन पूरी तरह फेल ह।

प्रमंडलीय आयुक्त का सख्त निर्देश: किसानों को सही दर एवं सही समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करायें l

प्रमंडलीय आयुक्त का सख्त निर्देश: किसानों को सही दर एवं सही समय पर पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध करायें l
तिरहुत प्रमंडल में खाद वितरण पर सख्ती: कालाबाजारी रोकने को विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम और कंट्रोल रूम की स्थापना का निर्देश l
उर्वरक वितरण प्रणाली को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने हेतु नियमित निगरानी, निरीक्षण एवं नियंत्रण की सुदृढ़ व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश l
प्रमंडल अंतर्गत जिलों के डीएओ के साथ आयुक्त ने की बैठक l
प्रमंडल अंतर्गत सभी जिलों के किसानों को उचित दर पर और सही समय पर पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। यह निर्देश तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने आयुक्त कार्यालय में क्षेत्रीय कृषि निदेशक सहित प्रमंडल के सभी छह जिलों के जिला कृषि पदाधिकारी के साथ आयोजित बैठक में दिया।
आयुक्त ने स्पष्ट कहा कि किसानों को खाद की उपलब्धता में किसी प्रकार की बाधा या कृत्रिम संकट बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने उर्वरकों की कालाबाजारी पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि इसके विरुद्ध सतत एवं प्रभावी मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित की जाए। जिला कृषि पदाधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट कर खाद दुकानों का औचक निरीक्षण करने, स्टॉक रजिस्टर की जांच करने तथा किसानों से सीधे फीडबैक प्राप्त कर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
बैठक में आयुक्त ने कहा कि मॉनिटरिंग सिस्टम को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बन सके। उन्होंने प्रत्येक जिले में नियंत्रण कक्ष स्थापित करने तथा इसकी मॉनिटरिंग जिला कृषि पदाधिकारी को करने को कहा। साथ ही अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वहां उर्वरक से संबंधित शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए। किसी भी किसान को खाद के लिए भटकना न पड़े, यह प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आयुक्त ने कहा कि किसानों को नैनो यूरिया अथवा अन्य वैकल्पिक उत्पादों को लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसान अपनी जरूरत और खेती की आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक का चयन करने एवं क्रय करने के लिए स्वतंत्र हैं। किसी भी प्रकार का दबाव या अनुचित प्रलोभन स्वीकार्य नहीं होगा।
सीमावर्ती जिलों—पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण एवं सीतामढ़ी—में यूरिया की संभावित कालाबाजारी को लेकर भी आयुक्त ने गंभीरता व्यक्त की। उन्होंने इन जिलों के जिला कृषि पदाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने, मॉनिटरिंग प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा उर्वरक के भंडारण एवं वितरण की नियमित निगरानी, निरीक्षण एवं समीक्षा करने के निर्देश दिए। आयुक्त ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी से अवैध भंडारण और अवैध आपूर्ति पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
बैठक में आयुक्त ने मनचाहा रेट वसूलने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि उर्वरक विक्रेता सरकारी दिशा-निर्देश एवं मानक के अनुसार ही खाद की बिक्री सुनिश्चित करेंगे। यदि कोई विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक दर वसूलते पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी दुकानों पर उर्वरकों की दर सूची स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हो और स्टॉक की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कहा कि कृषि क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की जरूरतों की अनदेखी किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने अधिकारियों से समन्वय के साथ कार्य करने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। बैठक के अंत में उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक जरूरतमंद किसान को पर्याप्त मात्रा में, सही दर पर और समय पर खाद उपलब्ध हो, ताकि फसल उत्पादन प्रभावित न हो।
आयुक्त ने सभी जिला कृषि पदाधिकारी को किसानों के हित में निबंधन की गति को तेज करने तथा अधिक से अधिक किसानों का निबंधन सुनिश्चित करने को कहा ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें दिलाया जा सके। इसके लिए सभी जिला कृषि पदाधिकारी को अपने अधीनस्थ प्रखंड कृषि पदाधिकारी कृषि समन्वयक एवं किसान सलाहकार को सक्रिय एवं तत्पर कर कार्य में तेजी लाने तथा शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का निर्देश दिया।

सामूहिक अनशन का चौथा दिन, बेनीबाद में अनशनकारी की तबीयत बिगड़ी ,प्रशासन नें सुधि नहीं ली l

अनशन का चौथा दिन, बेनीबाद में अनशनकारी की तबीयत बिगड़ी ,प्रशासन नें सुधि नहीं ली l
दीपक कुमार। गायघाट 
हम बढ़ मुक्त एव तटबंध मुक्त क्षेत्र चाहते है- जितेंद यादव 
चौथे दिन भी प्रशासन नें सुधि नहीं ली 
अनशन स्थल पर सैकड़ों की संख्या में जनभागीदारी हो रही है ।
गायघाट।बेनीबाद में विनाशकारी बाग़मती तटबंध के ख़िलाफ़ चौथा दिन चास-वास जीवन बचाओ बागमती संघर्ष मोर्चा का अनशन जारी रहा , अनशनकारी की तबीयत बिगड़ रही है । वही चास-वास जीवन बचाओं बाग़मती संघर्ष मोर्चा के संयोजक सह पूर्व जिला पार्षद जितेन्द्र यादव ने कहा कि हम बाढ़ एवं बाँध मुक्त क्षेत्र चाहते हैं । यदि सरकार डाउन स्ट्रीम में जल निकासी का प्रबंध कर दें तो सम्पूर्ण बागमती क्षेत्र बिना तटबंध बनाएँ बाढ़ मुक्त हो सकता है , इसलिए हम परियोजना के कार्य रोक कर परियोजना का रिव्यू करने की माँग करते हैं !!
अनशन स्थल पर सभा की अध्यक्षता जगन्नाथ पासवान एवं संचालन राहुल कुमार ने किया ,सभा को संबोधित की :- धरने को विद्यानन्दन पासवान( सामाजिक राजनीतिक कार्यकर्ता ) नन्दकिशोर ठाकूर (सामाजिक कार्यकर्ता )
 विश्वभर प्रसाद यादव (सरपंच ),नवल किशोर सिंह 
चंद्रेश्वर पाल ,गंगा परसाद यादव ,ललित ,सुशील ,
राजकिशोर राय आदि ने भी संबोधित किया।