दीपक कुमार। (क्राइम रिपोर्टर)
मुज़फ़्फ़रपुर जिला के गायघाट थाना अंतर्गत चोरानियाँ गाँव में पुलिस गोलीकांड में 60 वर्षीय जगतवीर राय की मौत ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि व्यवस्था और संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह है।
घटना के बाद पूर्णिया के सांसद ने शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की और आर्थिक सहयोग भी प्रदान किया। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुखद बताते हुए निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पप्पू यादव का यह कदम उनके उस जुझारू स्वभाव को दर्शाता है, जिसके लिए वे जाने जाते हैं। बार-बार राजनीतिक और कानूनी दबावों का सामना करने के बावजूद, वे पीड़ितों के बीच पहुंचते हैं—चाहे मामला पुलिसिया कार्रवाई का हो या सामाजिक अन्याय का। यह हिम्मत आज के राजनीतिक माहौल में कम ही देखने को मिलती है।
लेकिन ! सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या हमारी पुलिस व्यवस्था इतनी कठोर हो चुकी है कि अपने ही नागरिकों पर गोली चलाना सामान्य बात बनती जा रही है? एक वृद्ध व्यक्ति, जो जीवन के अंतिम पड़ाव पर था, उसे इस तरह मौत के घाट उतार देना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। यदि ऐसी घटनाओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती और दोषियों को सजा नहीं मिलती, तो कानून पर जनता का विश्वास धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा।
ऐसे समय में जरूरत है कि जनप्रतिनिधि, जैसे पप्पू यादव, इस मुद्दे को सिर्फ गांव या जिला स्तर तक सीमित न रखें, बल्कि इसे संसद तक ले जाएं। जब तक इस तरह के मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस नहीं होगी, तब तक न्याय की उम्मीद अधूरी ही रहेगी।
अंत में, ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति दें। साथ ही, समाज और व्यवस्था से यह अपेक्षा है कि न्याय केवल शब्दों में नहीं, बल्कि वास्तविकता में भी दिखाई दे।