जिला निबंधन एवं परामर्श केन्द्र मुजफ्फरपुर के प्रांगण में मुख्यमंत्री निश्चय स्वंय सहायता भत्ता योजना के अंतर्गत एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया

जिला निबंधन एवं परामर्श केन्द्र मुजफ्फरपुर के प्रांगण में मुख्यमंत्री निश्चय स्वंय सहायता भत्ता योजना के अंतर्गत एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया lआज दिनांक 14.03.2026 की जिला निबंधन एवं परामर्श केन्द्र मुजफ्फरपुर के प्रांगण में मुख्यमंत्री निश्चय स्वंय सहायता भत्ता योजना के अंतर्गत एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया है। जिसमें मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना के बारे में श्री अमरेन्द्र कुमार मिश्रा, जिला कल्याण पदाधिकारी, मुज0, मनोज कुमार प्रधान, प्रबंधक एवं श्री बैभव कुमार, सहायक प्रबंधक, योजना, जिला निबंधन एवं परामर्श केन्द्र, मुजफ्फरपुर के द्वारा विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी । ज्ञातव्य हो कि मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना में स्नातक (सिर्फ B.A., BSc, & B.Com) उतीर्ण 20 से 25 आयुवर्ग के विद्यार्थियों को भी योजना का लाभ दिया जाना है। 
बैठक में सभी विकास मित्रों को निदेश दिया गया है कि 31.03.2026 तक अपने-अपने पंचायत से कम से कम 10 लाभार्थियों की सूची बनाकर लाभार्थियों को जिला निबंधन एवं परामर्श केन्द्र में सत्यापन हेतु भेजना सुनिश्चित करेंगें। प्रबंधक के द्वारा मुजफ्फरपुर जिले के सभी प्राचार्य /प्राभारी प्राचार्य से अनुरोध किया गया है कि अपने-अपने महाविद्यालय के स्नातक उत्तीर्ण 20 से 25 आयुवर्ग के विद्यार्थियों को मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता का लाभ प्रदान कराने का अनुरोध किया गया है।   
ज्ञातव्य हो कि इस योजना के स्नातक उत्तीर्ण बेरोजगार युवाओं को रोजगार तलाशने के दौरान सहायता के तौर पर 1000 रूपये प्रतिमाह की दर से स्वयं सहायता भत्ता दो वर्षो के लिए प्रदान की जाती है।

मुजफ्फरपुर, संयुक्त श्रम भवन, गन्निपुर, स्थित उप श्रम आयुक्त का कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर के सभागार में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास हेतु राज्य रणनीति एवं कार्य योजना, 2025 के अन्तर्गत एक दिवसीय कार्यशाला/सेमिनार का आयोजन किया गया।

मुजफ्फरपुर, संयुक्त श्रम भवन, गन्निपुर, स्थित उप श्रम आयुक्त का कार्यालय, तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर के सभागार में बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास हेतु राज्य रणनीति एवं कार्य योजना, 2025 के अन्तर्गत एक दिवसीय कार्यशाला/सेमिनार का आयोजन किया गया। 
आयोजन का उद्घाटन संयुक्त रूप से उप श्रम आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल मुजफ्फरपुर - नीरज नयन, सहायक श्रमायुक्त, मुजफ्फरपुर - राकेश रंजन, सहायक श्रमायुक्त, बेतियासुबोध कुमार, श्रम अधीक्षक, मुजफ्फरपुर - अजय कुमार, श्रम अधीक्षक वैशाली - शशि कुमार सक्सेना, श्रम अधीक्षक, सीतामढ़ी प्रभारी- पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) - रमाकांत कुमार, श्रम अधीक्षक, शिवहर/प्रभारी - पश्चिम चंपारण (बेतिया)- विजय कुमार ठाकुर , और अध्यक्ष, जिला बाल कल्याण समिति मुजफ्फरपुर- उदय शंकर शर्मा/ NGO कानूनी सलाहकार निर्देश, मुजफ्फरपुर से अमोद कुमार एवं अनिल कुमार / थानाध्यक्ष रेल पुलिस - रंजीत कुमार, के द्वारा दीप प्रज्वलन कर संयुक्त रूप से किया गया ।
 इस कार्यक्रम में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, वैशाली, शिवहर, पुर्वी चंपारण (मोतिहारी)और पश्चिम चंपारण (बेतिया) जिले में पदस्थापित सभी प्रखंडों के श्रम प्रवर्तन पदाधिकारीयों ने भाग लिया ।
इस प्रमंडल स्तरीय कार्यक्रम के संयोजक उप श्रम आयुक्त, तिरहुत प्रमंडल, मुजफ्फरपुर ने उपस्थित सभी प्रतिभागियों को जानकारी दी कि बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए राज्य कार्य योजना 2025 लागू किया गया है जिसमें बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित कार्यों के लिए 18 विभागों को अलग अलग जिम्मेदारी दी गई है ।
  राज्य कार्य योजना 2025 में दिए गए प्रावधानों एवं बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित विभिन्न कानूनों की जानकारी सभी हितधारकों को दी गई ।
उप श्रमायुक्त के द्वारा बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन ) अधिनियम 1986 एवं यथासंशोधित 2016 की विस्तार से जानकारी दी गई ।
*उप श्रम आयुक्त ने बताया कि बच्चों का स्थान स्कूल में है, खेल के मैदान में है ना कि किसी होटल, ढाबा, मोटर गैरेज, फैक्ट्री आदि में, शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत 14 वर्ष तक के बच्चों को अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त है और हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों को शिक्षा प्राप्त हो और उनका बचपन सुरक्षित रहे ताकि वो आगे चलकर इस देश का एक जिम्मेदार नागरिक बनें और देश एवं समाज के विकास में अपनी भागीदारी दें*।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉक्टर रश्मि राज, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी, मुरौल द्वारा किया गया।
अन्य श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी द्वारा तकनीकी सत्र में बाल श्रमिकों की विमुक्त एवं पुनर्वास से संबंधित अधिनियम , राज्य कार्य योजना तथा आर्थिक एवं गैर आर्थिक पुनर्वास के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई ।
 उन्होंने बताया कि बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 की धारा 3 के तहत 14 वर्ष से कम आयु के किसी भी बच्चे से काम कराना प्रतिषिद्ध है तथा बच्चों से कार्य कराने पर इस अधिनियम की धारा 14(1) के तहत 20000 रुपए से 50000 रुपये तक का जुर्माना या 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास या दोनों से दंडित किए जाने का प्रावधान है ।
अध्यक्ष/सदस्य बाल कल्याण समिति के द्वारा बताया गया कि बाल कल्याण समिति किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत गठित एक जिला-स्तरीय वैधानिक संस्था है। इसका मुख्य कार्य जरूरतमंद बच्चों (अनाथ, परित्यक्त, दुर्व्यवहार के शिकार) के कल्याण, पुनर्वास, सुरक्षा और उनके सर्वाेत्तम हितों की रक्षा करना है। 
बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास हेतु सीडब्ल्यूसी जरूरतमंद बच्चों के मामलों की जांच करती है, उन्हें बाल देखभाल संस्थानों, फोस्टर केयर (पालक देखभाल), या गोद लेने के लिए योग्य घोषित कर पुनर्वास करती है। बच्चों को आश्रय देना समिति बच्चों के लिए तत्काल सुरक्षा और आश्रय, शिक्षा, स्वास्थ्य, और भावनात्मक सहयोग सुनिश्चित करती है। परिदृश्य का मूल्यांकन और निर्णयरू बच्चे के परिवार की सामाजिक जांच रिपोर्ट के आधार पर, यह निर्धारित करना कि बच्चा परिवार के साथ रहने के लिए सुरक्षित है या उसे संस्थागत देखभाल की आवश्यकता है। संस्थाओं की निगरानीर बाल कल्याण समिति अपने जिले के सभी बच्चों के देखभाल संस्थानों का नियमित निरीक्षण करती है ताकि बच्चों के साथ दुर्व्यवहार न हो। परिवार में पुनर्मिलन यदि संभव हो तो, जांच के बाद बच्चे को उसके माता-पिता या रिश्तेदारों के साथ पुनर्मिलन कराना, यह सुनिश्चित करने के बाद कि वह वहां सुरक्षित है। गोद लेने की प्रक्रियारू परित्यक्त बच्चों को कानूनी रूप से गोद लेने के लिए स्वतंत्र घोषित करना। 
 श्रम अधीक्षक, मुजफ्फरपुर द्वारा बाल श्रम उन्मूलन हेतु सभी को प्रभावी कदम उठाने हेतु प्रेरित किया गया। बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन एवं पुनर्वास हेतु राज्य रणनीति एवं कार्य योजना, 2025 के अन्तर्गत उपस्थित हितधारकों के द्वारा उठाये गए समस्याओं का निराकरण किया गया। 
उप श्रम आयुक्त के द्वारा शिविर में उपस्थित सभी हितधारकों से किसी भी परिस्थिति में प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष परोक्ष रूप से बाल मजदूर से कोई कार्य नहीं लिए जाने संबंधी शपथ भी दिलाई गई।        
श्रम अधीक्षक के द्वारा बताया गया कि राज्य कार्य योजना के अनुसार बाल श्रम उन्मूलन हेतु धावादल के माध्यम से सघन अभियान चलाकर बाल श्रमिकों का विमुक्ति जारी है। विमुक्ति के समय प्रत्येक बाल श्रमिक को एक माह का राशन एवं वस्त्र हेतु रू०- 3000/-(तीन हजार रुपया ) का भुगतान किया जा रहा है कि जानकारी दी गई।
साथ ही विमुक्त सभी बाल श्रमिकों को 25,000 रुपया माननीय मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जाता है ।
 कार्यशाला के अंत में श्रम अधीक्षक, मुजफ्फरपुर द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम समाप्त किया गया।

शहद की मिठास से बदलेगी महिलाओं की तकदीर - समीर l मधु ग्राम महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ी महिलाओं के कारोबार को सशक्त करने के लिए आयोजित हुई कार्यशाला l

शहद की मिठास से बदलेगी महिलाओं की तकदीर - समीर l
 मधु ग्राम महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से जुड़ी महिलाओं के कारोबार को सशक्त करने के लिए आयोजित हुई कार्यशाला l
 ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत संचालित जीविका महिलाओं की तकदीर बदलने के लिए लगातार काम कर रही है, आसपास के जिले की महिलायें भी मधुमक्खी पालन कर अपना भविष्य सवार रही है. मधुमक्खी पालन करने वाली महिलाओं की तकदीर को संवारने के लिए जीविका लगातार बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर बाजार मुहैया करा रही है. शहद की मिठास से महिलाओं के जिंदगी में आर्थिक उन्नति काफी तेजी से हो रही है. उक्त बातें जीविका के राज्य परियोजना प्रबंधक (गैर क़ृषि) श्री समीर कुमार ने कार्यशाला में कहीं l. बताते चले कि मधु ग्राम महिला प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा शहर के एक निजी होटल में "मधुमक्खी पालन से समृद्धि की ओर" विषय पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला का शुभारंभ श्री समीर कुमार राज्य परियोजना प्रबंधक (नॉन फॉर्म ) श्रीमती अनीशा डीपीएम जीविका मुजफ्फरपुर, श्रीमती वंदना कुमारी डीपीएम वैशाली, श्री सुर्दीप्त समदर्शी, डाबर के अजय कुमार के साथ मधुग्राम की दीदियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित करते हुए किया. कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने मधु ग्राम कंपनी क़ो आगे बढ़ाने के लिए दीदियों के साथ चर्चा की और रणनीति तय किया. इस कार्यक्रम के दौरान मधुमक्खी पालन करने वाली मुजफ्फरपुर, वैशाली, पश्चिमी चंपारण,और पूर्वी चंपारण की जीविका दीदियों ने अपने अनुभव बताएं और इस साल मधुमक्खी पालन करते हुए ज्यादा से ज्यादा शहद की बिक्री के लिए रणनीति पर बात कि. कार्यक्रम में अच्छा कार्य करने वाली दीदियों के साथ ही कैडर को सम्मानित भी किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत में मधु ग्राम से जुड़ी दीदियों ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कंपनी के कारोबार के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीपीएम अनीशा ने कहा कि जीविका से जुड़कर महिलाएं काफी आगे बढ़ रही हैं शहद उत्पादन के क्षेत्र में भी काफी अच्छा काम हो रहा है. इस साल भी लक्ष्य के अनुरूप शहद उत्पादन का कार्य किया जाएगा. वही वैशाली की डीपीएम वंदना कुमारी ने मधु ग्राम से जुड़ी दीदियों को भरोसा दिलाया कि अच्छा शहद का उत्पादन होगा तो उन्हें अच्छा मूल्य भी दिया जाएगा. वही डाबर से जुड़े अजय कुमार ने बताया कि जीविका से जुड़ी दीदियों का शहद काफी अच्छा होता है अच्छे गुणवत्ता वाले शहद के लिए हम अच्छा मूल्य भी प्रदान कर रहे हैं और लक्ष्य के मुताबिक इस साल भी अगर हमें शहद प्राप्त होता है तो अच्छा लाभ दीदियों क़ो होगा. कार्यक्रम का संचालन मनीष कुमार नॉन फार्म प्रबंधक वैशाली ने किया. कार्यक्रम के अंत में सभी दीदियों ने चमकी बुखार से बचाव के लिए शपथ भी लिया. इस दौरान संचार प्रबंधक राजीव रंजन, संतोष कुमार,आनंद कुमार, शिवम कुमार, इमरान अली, चुनचुन कुमार सहीत कई जीविका कर्मी और जीविका दीदियाँ उपस्थित थी.

औराई पीएचसी में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने पर प्रशासन सख्त, चिकित्सक से स्पष्टीकरण तलब l

मुजफ्फरपुर, औराई पीएचसी में अल्ट्रासाउंड सेवा बंद होने पर प्रशासन सख्त, चिकित्सक से स्पष्टीकरण तलब l
जिले के दूरस्थ ग्रामीण, गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को उनके घर के समीप ही सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज एवं जांच की सुविधा l
जिले के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब एवं जरूरतमंद मरीजों को बेहतर, त्वरित एवं सुगम स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए उनके घर के पास ही सरकारी अस्पतालों में इलाज एवं जांच की व्यवस्था की गई है ताकि उन्हें इलाज/जांच के लिए जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़े तथा उनके समय एवं पैसे की बर्बादी न हो। जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन के मार्गदर्शन में जिला से लेकर सभी PHC, APHC, CHC, HWC मैं डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति से लेकर मरीजों की चिकित्सा एवं जांच की सुविधाओं की नियमित जांच की व्यवस्था की गई है ताकि स्वास्थ्य सेवा में निरंतर सुधार परिलक्षित हो तथा आम लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं समय पर मिल सके। जिला पदाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन के निर्देश पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र औराई में अल्ट्रासाउंड संचालन की व्यवस्था की जांच सिविल सर्जन द्वारा कराई गई।
जांच के क्रम में अल्ट्रासाउंड सेवा के संचालन में लापरवाही सामने आई जिस पर असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (सीएस) मुजफ्फरपुर ने संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण तलब करते हुए सेवा को नियमित रूप से संचालित करने का निर्देश दिया है। इस संबंध में 
सीएस ने पत्र जारी कर कहा है कि स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार सरकारी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू की गई है, ताकि आम लोगों को सस्ती और सुलभ जांच सुविधा मिल सके। इसके तहत औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई गई है और इसके संचालन के लिए नामित चिकित्सक को अधिकृत किया गया है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण और गरीब मरीजों को सरकारी अस्पतालों में ही अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध हो, जिससे उन्हें निजी जांच केंद्रों पर अधिक पैसा खर्च नहीं करना पड़े। लेकिन औराई सीएचसी में निर्धारित व्यवस्था के बावजूद अल्ट्रासाउंड सेवा का नियमित संचालन नहीं हो रहा है, जो गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
सीएस ने अपने पत्र में कहा है कि अल्ट्रासाउंड सेवा का संचालन नहीं होना सरकार की योजनाओं और आम मरीजों के हित के खिलाफ है। इसलिए संबंधित चिकित्सक से पूछा गया है कि आखिर किस कारण से सेवा नियमित रूप से संचालित नहीं की जा रही है। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया है कि निर्धारित नियमों के तहत अल्ट्रासाउंड सेवा का संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि मरीजों को इसका लाभ मिल सके।
सीएस ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा सामने आती है तो संबंधित चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
 जिलाधिकारी ने कहा है कि सरकारी अस्पतालों में सभी स्वास्थ्य सेवाओं को नियमित और प्रभावी तरीके से संचालित करना प्राथमिकता है, ताकि आम लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

मुजफ्फरपुर, जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विकास कार्यों की समीक्षा, पेयजल आपूर्ति व मेडिकल कचरा प्रबंधन पर सख्त निर्देश l

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विकास कार्यों की समीक्षा, पेयजल आपूर्ति व मेडिकल कचरा प्रबंधन पर सख्त निर्देश l
जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में सरकार द्वारा संचालित विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं की अद्यतन स्थिति एवं प्रगति की प्रखंडवार समीक्षा की गई। बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों को कार्यों के समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों तक सुगमता से पहुंचे, इसके लिए सभी अधिकारी पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ कार्य करें।
बैठक में गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था पर विशेष चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि सभी प्रखंडों में खराब पड़े चापाकलों और नल-जल योजनाओं की सूची प्रखंडवार तैयार की जाए। उन्होंने उप विकास आयुक्त को इस कार्य की नियमित समीक्षा कर सभी खराब चापाकलों एवं नल-जल योजनाओं को शीघ्र ठीक कराने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो चापाकल बिल्कुल पुराने और जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं, उन्हें हटाकर नई व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि गर्मी के मौसम में आम लोगों को पेयजल की किसी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।
जिलाधिकारी ने लोक सेवा अधिकार अधिनियम के अंतर्गत आम नागरिकों के आवेदनों का समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से निष्पादन सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने सभी प्रखंडों और अंचलों में आरटीपीएस काउंटर को सक्रिय रखने तथा नियमानुसार प्राप्त आवेदनों का समय पर निष्पादन करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही सभी आवेदनों की प्रविष्टि संबंधित पोर्टल पर अनिवार्य रूप से दर्ज करने को कहा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और नागरिकों को सेवाएं समय पर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को कार्यालय में उपस्थित रहकर आम जनता से संवाद करें और उनकी समस्याओं तथा शिकायतों की सुनवाई कर उनका समुचित समाधान सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि जिला, नगर निकाय, प्रखंड, अंचल और पंचायत स्तर पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित निष्पादन किया जाए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री जनता दरबार से प्राप्त मामलों का भी शीघ्र निपटारा कर उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों में पेयजल की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया कि जिले के शेष बचे हुए आंगनबाड़ी केंद्रों को भी नल-जल योजना से आच्छादित किया जाए। इसके लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (आईसीडीएस) को सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों से प्रतिवेदन प्राप्त कर शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
भूमि से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने म्यूटेशन, परिमार्जन और भूमि मापी के मामलों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन मामलों के लंबित रहने से आम लोगों को काफी परेशानी होती है, इसलिए इनका समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।
बैठक के दौरान मेडिकल कचरे (बायो-मेडिकल वेस्ट) के अनुचित निपटान से होने वाले खतरों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि मेडिकल कचरे का यत्र-तत्र फेंका जाना न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि इससे मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ मेडिकल कचरे के वैज्ञानिक एवं नियमसम्मत प्रबंधन को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बैठक में बताया गया कि अस्पतालों, क्लीनिकों, पैथोलॉजी लैब, पशु चिकित्सा केंद्रों तथा टीकाकरण केंद्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बायो-मेडिकल कचरा निकलता है। यदि इसका उचित तरीके से निपटान नहीं किया जाए तो यह संक्रमण और प्रदूषण का बड़ा कारण बन सकता है। संक्रमित सुई, ब्लेड, ड्रेसिंग सामग्री तथा रक्त और शारीरिक द्रव से सने पदार्थ कई गंभीर रोगों के प्रसार का माध्यम बन सकते हैं। 
जिलाधिकारी ने बताया कि खुले में मेडिकल कचरा जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है और जहरीली गैसें वातावरण में फैलती हैं। वहीं रासायनिक अपशिष्ट मिट्टी और भूजल को प्रदूषित कर दीर्घकालिक पर्यावरणीय क्षति पहुंचाते हैं। प्लास्टिक आधारित मेडिकल कचरा लंबे समय तक पर्यावरण में बना रहता है और पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। इसके अलावा खुले में फेंका गया मेडिकल कचरा जानवरों द्वारा इधर-उधर फैलाया जा सकता है, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
बैठक में यह भी बताया गया कि दवाओं के अवशेष पर्यावरण में पहुंचकर जीवाणुओं में एंटीबायोटिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर सकते हैं, जो भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकता है।
जिलाधिकारी ने सभी सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों को सरकारी नियमों और मानकों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने सिविल सर्जन को जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों का निरीक्षण कर सूची तैयार करने तथा चिन्हित संस्थानों को 48 घंटे के भीतर कचरे के उचित निपटान का निर्देश देने को कहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मेडिकल कचरे के सुरक्षित संग्रहण और परिवहन के लिए रंग-कोडेड डस्टबिन — पीला, लाल, नीला और सफेद — के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक प्रकार के कचरे को निर्धारित रंग के कंटेनर में ही संग्रहित किया जाना चाहिए, ताकि उसका वैज्ञानिक तरीके से उपचार और निपटान संभव हो सके।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि किसी भी परिस्थिति में मेडिकल कचरे को अनधिकृत रूप से न तो फेंका जाए और न ही जलाया जाए। ऐसा करने पर संबंधित संस्थान के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नगर निकायों को नियमित निगरानी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को समय-समय पर निरीक्षण कर नियमों के अनुपालन की समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।
जिलाधिकारी ने कहा कि मेडिकल कचरे के प्रभावी प्रबंधन के लिए केवल नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इससे जुड़े कर्मियों को प्रशिक्षित करना और आम लोगों को जागरूक करना भी आवश्यक है। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों और सफाई कर्मियों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने तथा आम जनता के बीच जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन ने कहा कि मेडिकल कचरे का वैज्ञानिक एवं नियमसम्मत प्रबंधन जनस्वास्थ्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों, नगर निकायों और आम नागरिकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। सभी हितधारकों के समन्वित प्रयास से ही जिले में मेडिकल कचरे के सुरक्षित और प्रभावी प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था स्थापित की जा सकती है और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण का निर्माण संभव है।