लखीसराय के 27 प्रगतिशील लीची किसानों को मिला चार दिवसीय उन्नत प्रशिक्षण, मधुमक्खी पालन पर विशेष जोर l
*रौशन कुमार/पटना:* लीची उत्पादन में लगे किसानों को नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधानों से जोड़ने के उद्देश्य से भाकृअनुप-राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (27-30 जनवरी, 2026) लखीसराय जिले के लीची उत्पादक किसानों के लिए आत्मा, लखीसराय द्वारा प्रायोजित था।
आपको बता दें कि 'लीची आधारित फलदार वृक्षों की वैज्ञानिक खेती एवं उनका प्रबंधन' विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में लखीसराय जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए 27 प्रगतिशील लीची उत्पादक किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को लीची उत्पादन की आधुनिक एवं उन्नत तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।
विशेष रूप से, किसानों को प्रयोगशाला एवं खेत स्तर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इसमें लीची का पोषण प्रबंधन, रोग-कीट प्रबंधन, तथा तुड़ाई उपरांत फलों के संरक्षण एवं विपणन से संबंधित नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधानों पर आधारित तकनीकों से अवगत कराया गया। जिन प्रमुख तकनीकों पर जानकारी दी गई, उनमें उच्च गुणवत्ता पौध-रोपण प्रबंधन, एकीकृत पोषण एवं कीट-रोग प्रबंधन, माइक्रो-इरिगेशन एवं जल प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल प्रौद्योगिकियाँ, हाई-डेन्सिटी प्लांटिंग एवं छंटाई तकनीक और लीची का बाद-कटाई प्रबंधन एवं मूल्य संवर्धन शामिल रहे।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए केन्द्र के निदेशक डॉ. बिकाश दास ने किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लीची की वैज्ञानिक खेती अपनाकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में जलवायु-अनुकूल एवं आधुनिक तकनीकों को अपनाना समय की मांग है। डॉ. दास ने किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत बताते हुए कहा कि लीची के साथ मधुमक्खी पालन किसानों के लिए एक बेहतर वैकल्पिक आय स्रोत बन सकता है, जिससे परागण में सुधार के साथ अतिरिक्त आमदनी भी संभव है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. भाग्या विजयन ने बताया कि इस चार दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को प्रयोगशाला और खेत दोनों स्तरों पर आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को ऐसी तकनीकों से जोड़ना है, जिससे वे अपने क्षेत्र में लीची उत्पादन को अधिक सफल, टिकाऊ और लाभकारी बना सकें।
इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभय कुमार, वैज्ञानिक डॉ. प्रभात कुमार, सोमेश कुमार, यंग प्रोफेशनल धर्मदेव भारती एवं श्याम पंडित भी उपस्थित रहे।
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