मुजफ्फरपुर, स्वास्थ्य व आईसीडीएस की व्यापक समीक्षा: संस्थागत प्रसव, टीकाकरण और पोषण पर जिलाधिकारी के सख्त निर्देश lमुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रशासन की कड़ी नजर, लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत l

स्वास्थ्य व आईसीडीएस की व्यापक समीक्षा: संस्थागत प्रसव, टीकाकरण और पोषण पर जिलाधिकारी के सख्त निर्देश l
मुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रशासन की कड़ी नजर, लापरवाही पर कार्रवाई के संकेत l
मातृ-शिशु स्वास्थ्य और कुपोषण, फाइलेरिया उन्मूलन को नई गति,
जिले में स्वास्थ्य सेवाओं एवं महिला-बाल विकास से जुड़ी योजनाओं को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं परिणामोन्मुखी बनाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में सोमवार को समाहरणालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग एवं आईसीडीएस की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति, संस्थागत प्रसव, टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन, पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी), फाइलेरिया उन्मूलन अभियान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

ग्रामीण महिलाओं की स्वास्थ्य सेवाओं पर विशेष जोर
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समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सुलभ, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रखंड में प्रशिक्षित डॉक्टर एवं नर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करते हुए संस्थागत प्रसव की व्यवस्था हर हाल में सुदृढ़ की जाए।
उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं का समय रहते उपचार संभव बनाता है।
समीक्षा में यह जानकारी दी गई कि दिसंबर माह में जिले में कुल 5834 संस्थागत प्रसव कराए गए। 

पीएचसी से जिला अस्पताल तक सघन निगरानी
जिलाधिकारी ने पीएचसी, सीएचसी से लेकर जिला अस्पताल तक स्वास्थ्य सेवाओं के सभी प्रमुख सूचकांकों की गहन समीक्षा की। उन्होंने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि वे पीएचसी एवं सीएचसी का नियमित साप्ताहिक निरीक्षण करें तथा रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति, नि:शुल्क दवा वितरण, पैथोलॉजी जांच, ओपीडी संचालन एवं स्वच्छता व्यवस्था की नियमित जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
इसके साथ ही मरीजों से फीडबैक लेकर अव्यवस्थित कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने के निर्देश दिए गए। ओपीडी उपलब्धि, सिजेरियन ऑपरेशन, गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, क्षयरोग जांच, एईएस की स्थिति तथा आईसीडीएस योजनाओं की भी समीक्षा की गई।

टीकाकरण में उल्लेखनीय प्रगति, 100% लक्ष्य का निर्देश
टीकाकरण की समीक्षा में पाया गया कि दिसंबर माह में 12,439 के लक्ष्य के विरुद्ध 11,811 बच्चों का टीकाकरण कर 95 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की गई। वहीं अप्रैल से दिसंबर 2025 तक 1,11,951 लक्ष्य के विरुद्ध 1,05,712 बच्चों का टीकाकरण किया गया।
साहेबगंज, बंदरा, सकरा, औराई, मीनापुर, कांटी, कटरा, मुरौल एवं मुसहरी प्रखंडों में 95 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि दर्ज की गई। जिलाधिकारी ने सभी प्रखंडों को 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने का निर्देश देते हुए कहा कि स्लम एरिया, प्रवासी मजदूरों, रिक्शा चालकों, फुटपाथ पर रहने वाले एवं वंचित परिवारों के बच्चों पर विशेष फोकस किया जाए ताकि कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।
उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे अपने बच्चों का संपूर्ण टीकाकरण नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर अवश्य कराएं।

गर्भवती महिलाओं की जांच और पोषण पर सख्ती
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गर्भवती महिलाओं की प्रसव-पूर्व जांच की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को आवश्यक सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने ममता एवं आशा कार्यकर्ताओं को अधिक सक्रिय करते हुए प्रत्येक गांव में गर्भवती महिलाओं की पहचान, नियमित जांच एवं संस्थागत प्रसव के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
आयरन एवं कैल्शियम टैबलेट के सुचारू वितरण के लिए पर्याप्त टीम गठन करने तथा एनीमिया नियंत्रण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

पोषण पुनर्वास केंद्र: कुपोषण उन्मूलन की मजबूत कड़ी
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बैठक में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) की भी विस्तृत समीक्षा की गई। दिसंबर माह में कुल 22 तथा जनवरी में 36 बच्चों को एनआरसी में भर्ती कराया गया। इस पर जिलाधिकारी ने मोतीपुर, साहेबगंज,पारु, गायघाट, मीनापुर, सकरा के सीडीपीओ को प्रति माह न्यूनतम पांच बच्चों को एनआरसी भेजने का लक्ष्य निर्धारित करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि गंभीर तीव्र कुपोषण से पीड़ित बच्चों के उपचार, देखभाल एवं पुनर्वास में एनआरसी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। एनआरसी में 24×7 चिकित्सकीय सुविधा, स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, संक्रमण नियंत्रण, नियमित स्वास्थ्य आकलन, टीकाकरण, दवा एवं पोषण पूरक की शत-प्रतिशत व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
साथ ही माताओं को स्तनपान, अनुपूरक आहार एवं घरेलू स्तर पर पौष्टिक भोजन तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर जोर दिया गया।

स्वस्थ समाज की दिशा में ठोस कदम
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अंत में जिलाधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पोषण से जुड़ी योजनाएं सीधे आमजन के जीवन से जुड़ी हैं। इनका प्रभावी क्रियान्वयन ही स्वस्थ समाज की नींव रखता है। सभी अधिकारी संवेदनशीलता, निष्ठा एवं जवाबदेही के साथ कार्य करें ताकि मुजफ्फरपुर को स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में एक आदर्श जिला बनाया जा सके।

बैठक में उपस्थित अधिकारी
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बैठक में उप विकास आयुक्त श्री श्रेष्ठ अनुपम, सिविल सर्जन डॉ. अजय कुमार, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी, डीपीओ आईसीडीएस, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, बीपीएम, बीसीएम एवं अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।

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