बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) के पदाधिकारियों द्वारा दिनांक 30.01.2026 को मंत्रिपरिषद् की बैठक दिनांक 29.01.2026 में लिए गए निर्णय संख्या 23 एवं 30 के विरुद्ध अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर जाने की घोषणा की गई थी। यह निर्णय बिहार राजस्व सेवा नियमावली, 2010 की मूल भावना, सेवा में प्रवेश के समय निर्धारित शर्तों तथा माननीय उच्च न्यायालय, पटना में लंबित CWJC संख्या 5902/2024 एवं MJC संख्या 2380/2025 की भावना के प्रतिकूल था।
दिनांक 02.02.2026 को उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री की अध्यक्षता में राजस्व विभाग एवं बिहार राजस्व सेवा संघ के बीच हुई सकारात्मक एवं सौहार्दपूर्ण वार्ता में संघ को यह आश्वासन दिया गया कि मंत्रिपरिषद् के निर्णय संख्या 23 एवं 30 के आलोक में एक त्रि-स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा तथा बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के हितों की रक्षा की जाएगी। इस बैठक में मंत्री द्वारा यह भी स्पष्ट किया गया कि भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) जैसे अनुभव एवं विशेषज्ञता आधारित पदों पर बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों की पदस्थापना के सिद्धांत से विभाग सहमत है।
उक्त आश्वासन के क्रम में प्रधान सचिव के निर्देशानुसार राजस्व विभाग द्वारा दिनांक 03.02.2026 को पत्रांक 190 (3A/राजस्व) के माध्यम से एक अधिसूचना जारी की गई, जिसके तहत उच्च न्यायालय में लंबित मामलों के संदर्भ में सरकार के पक्ष को प्रस्तुत करने हेतु त्रि-सदस्यीय समिति का गठन किया गया तथा नई पदस्थापनाओं पर स्थगन का निर्णय लिया गया। इस अधिसूचना के आलोक में संघ की कार्यकारिणी सामूहिक अवकाश समाप्त करने के निर्णय पर गंभीरतापूर्वक विचार-विमर्श कर रही थी।
इसी बीच संघ के संज्ञान में यह तथ्य लाया गया कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा पत्रांक 2223, दिनांक 30.01.2026 के माध्यम से, वित्त विभाग के द्वारा महालेखाकार, बिहार को यह सूचित किया गया है कि भूमि सुधार उप समाहर्ता के 101 नए पद बिहार प्रशासनिक सेवा के अंतर्गत सृजित किए गए हैं तथा इन पदों पर बीपीएससी के माध्यम से चयनित नए अभ्यर्थियों की पदस्थापना की जानी है। यह पत्र दिनांक 02.02.2026 को उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री एवं संघ के बीच हुई सकारात्मक वार्ता की भावना के पूर्णतः विपरीत है।
संघ का यह स्पष्ट मत है कि उक्त पत्र न केवल उपमुख्यमंत्री की घोषित भावना के अनुरूप नहीं है, बल्कि प्रधान सचिव राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा किए जा रहे निरंतर सकारात्मक प्रयासों एवं संघ के साथ स्थापित बेहतर संवाद प्रक्रिया पर भी एक आघात के समान है। वर्तमान परिस्थितियों में संघ यह समझने को विवश है कि यह विषय अब राजस्व विभाग के अधिकार क्षेत्र में सीमित नहीं रह गया है। राजस्व विभाग अपने अधिकारियों के हितों के संरक्षण में दृढ़ता से खड़ा है, जिसका प्रमाण विभागीय अधिसूचनाओं से स्पष्ट है, परंतु सामान्य प्रशासन विभाग राजस्व विभाग के मंत्री एवं प्रधान सचिव की भावनाओं तथा संवेदनाओं का समुचित ध्यान रखने में असफल रहा है। इससे संघ के सभी सदस्य अत्यंत आहत हैं।
बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) के सभी सदस्यों के साथ हुए व्यापक विचार-विमर्श में यह सर्वसम्मति से पाया गया कि बिहार राजस्व सेवा नियमावली में सेवा के दौरान किया गया यह ऋणात्मक परिवर्तन संघ के सदस्यों के विधिक एवं नैसर्गिक अधिकारों के प्रतिकूल है और किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
अतः संघ यह स्पष्ट करता है कि पूर्व में चल रही सभी वार्ताओं एवं प्रयासों को विराम देते हुए अब इस विषय पर नए सिरे से प्रशासन के सर्वोच्च स्तर पर विचार की आवश्यकता है। तब तक, बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा) अपने सभी जिला कार्यकारणी एवं प्रदेश कार्यकारणी की सर्वसम्मति से अपने अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश को जारी रखने का निर्णय लेता है।
बिहार राजस्व सेवा संघ (बिरसा)
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