मुजफ्फरपुर में डीएलबीसी बैठक: सीडी रेशियो सुधार, कृषि व स्वरोजगार ऋण वितरण में तेजी के निर्देश ll

मुजफ्फरपुर में डीएलबीसी बैठक: सीडी रेशियो सुधार, कृषि व स्वरोजगार ऋण वितरण में तेजी के निर्देश ll
जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की सख्ती: केसीसी, डेयरी-फिशरीज व पीएम योजनाओं में लक्ष्यपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश l
बैंकिंग क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी से समावेशी विकास पर जोर, 12 मार्च ऋण शिविर को परिणामोन्मुखी बनाने का निर्देश ll
जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन की अध्यक्षता में जिला स्तरीय बैंकिंग समिति (डीएलबीसी) की महत्वपूर्ण बैठक समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई। बैठक में जिले के सभी वाणिज्यिक बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, सहकारी बैंकों तथा संबंधित विभागों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में बैंकिंग गतिविधियों की प्रगति की समग्र समीक्षा करना, वित्तीय समावेशन को सुदृढ़ बनाना, कृषि एवं स्वरोजगार आधारित ऋण वितरण में तेजी लाना तथा वार्षिक ऋण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना था।
बैठक की शुरुआत क्रेडिट-डिपॉजिट (सीडी) रेशियो की बैंकवार समीक्षा से हुई। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जिले में बैंकों में जमा की जा रही राशि का समुचित हिस्सा स्थानीय विकास, उद्योग, कृषि एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने में लगाया जाना चाहिए। जिन बैंकों का सीडी रेशियो निर्धारित मानक से कम पाया गया, उन्हें विशेष अभियान चलाकर ऋण वितरण बढ़ाने का निर्देश दिया गया। इस क्रम में यूको बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, बैंक ऑफ़ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ़ इंडिया, इंडियन बैंक तथा बैंक ऑफ़ बड़ौदा को विशेष ध्यान देकर आवश्यक सुधार एवं प्रगति लाने का निर्देश दिया गया। जिलाधिकारी ने अग्रणी जिला प्रबंधक को निर्देशित किया कि कम प्रदर्शन वाले बैंकों के साथ समन्वय स्थापित कर ठोस सुधारात्मक कार्ययोजना तैयार करें और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें।
वार्षिक क्रेडिट प्लान (एसीपी) की समीक्षा के दौरान बैंकवार उपलब्धि प्रतिशत की विस्तृत जानकारी ली गई। जिलाधिकारी ने लक्ष्य के अनुरूप ऋण वितरण सुनिश्चित करने पर बल देते हुए कहा कि कृषि, लघु एवं मध्यम उद्यम, स्वरोजगार तथा प्राथमिक क्षेत्र में ऋण प्रवाह को और गति दी जाए। जिन बैंकों की उपलब्धि संतोषजनक नहीं थी, उनमें यूको बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ़ महाराष्ट्र, बैंक ऑफ़ बड़ोदा, पंजाब नेशनल बैंक ,इंडियन बैंक, बैंक ऑफ़ इंडिया शामिल है। जिलाधिकारी ने उप विकास आयुक्त को समीक्षा कर प्रगति लाने का निर्देश दिया।उन्होंने कहा कि ऋण स्वीकृति की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाया जाए ताकि आमजन को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े और आवेदन लंबित न रहें।

क्रॉप लोन के अंतर्गत किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की प्रगति की भी विस्तार से समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि पात्र किसानों को शत-प्रतिशत केसीसी से आच्छादित किया जाए। कृषि विभाग एवं बैंकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर लंबित आवेदनों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने को कहा गया।  

केसीसी एनिमल हसबेंडरी के अंतर्गत पशुपालन से जुड़े किसानों को ऋण उपलब्ध कराने की स्थिति की भी समीक्षा की गई। जिलाधिकारी ने कहा कि डेयरी, बकरी पालन, पोल्ट्री एवं अन्य पशुपालन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बैंक सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने पशुपालन विभाग को निर्देश दिया कि योग्य लाभार्थियों की सूची बैंक शाखाओं को उपलब्ध कराई जाए, ताकि ऋण स्वीकृति में अनावश्यक विलंब न हो। जिन बैंकों का प्रदर्शन इस मद में कम पाया गया, उनमें पंजाब एंड सिंध बैंक तथा इंडियन ओवरसीज बैंक सहित अन्य बैंक शामिल रहे। इन बैंकों को लक्ष्य के अनुरूप प्रगति लाने का सख्त निर्देश दिया गया।

केसीसी फिशरीज की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने मत्स्य पालन से जुड़े लाभार्थियों को ऋण वितरण में तेजी लाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तालाब आधारित मत्स्य पालन, झींगा पालन एवं अन्य मत्स्य गतिविधियों में अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें बैंकिंग सहयोग से साकार किया जा सकता है। बैठक के दौरान जिला मत्स्य पदाधिकारी के विलंब से पहुंचने एवं लक्ष्य संबंधी जानकारी उपलब्ध नहीं रहने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। बैंक प्रतिनिधियों द्वारा यह अवगत कराए जाने पर कि मत्स्य विभाग द्वारा आवेदन प्रेषित नहीं किए गए हैं, इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए जिलाधिकारी ने जिला मत्स्य पदाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने तथा वेतन अवरुद्ध करने का निर्देश दिया।

डेयरी, पोल्ट्री एवं फिशरीज से संबंधित योजनाओं की बैंकवार समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि स्वरोजगार आधारित गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में ऋण वितरण बढ़ाकर न केवल रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं, बल्कि किसानों एवं ग्रामीण युवाओं की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया कि लाभार्थियों के चयन, प्रशिक्षण एवं अनुदान से संबंधित प्रक्रियाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण कर बैंक समन्वय सुनिश्चित करें।

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना की समीक्षा के दौरान प्रगति असंतोषजनक पाई गई। इस संदर्भ में यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, बिहार ग्रामीण बैंक, एक्सिस बैंक तथा आईसीआईसीआई बैंक सहित अन्य बैंकों को निर्देश दिया गया कि वर्ष 2025-26 की समाप्ति को ध्यान में रखते हुए ऋण स्वीकृति एवं वितरण का लक्ष्य यथाशीघ्र प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में छोटे उद्यमियों को वित्तीय सहयोग देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) की समीक्षा के क्रम में ऋण स्वीकृति की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया गया, किंतु बैंकों को निर्देश दिया गया कि लक्ष्य के अनुरूप ऋण वितरण भी समय पर सुनिश्चित किया जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि स्वीकृति और वितरण के बीच अनावश्यक अंतराल नहीं होना चाहिए।

सभी बैंकों को निर्देश दिया गया कि आगामी 12 मार्च 2026 को जिले में आयोजित होने वाले ऋण शिविर के पूर्व प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना एवं पीएमईजीपी के तहत लक्ष्य के अनुरूप शत-प्रतिशत ऋण स्वीकृति एवं वितरण सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि शिविर को परिणामोन्मुखी बनाया जाए और अधिकाधिक लाभार्थियों को मौके पर ही स्वीकृति पत्र प्रदान किए जाएं।

अंत में जिलाधिकारी ने सभी बैंक प्रतिनिधियों को सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने, लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करने तथा समन्वय की भावना से कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी से ही जिले का समग्र एवं समावेशी आर्थिक विकास संभव है। बैठक में लिए गए निर्णयों की प्रगति की समीक्षा अगली डीएलबीसी बैठक में की जाएगी।

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